खफा रहा (khafaa raha..)



(Original poetry by @kaunquest)

shikwa thi bas duniya se magar
kyun mai tum se khafaa raha..

शिकवा थी बस दुनिया से मगर
क्यूँ मैं तुम से खफा रहा

@kaunquest

Comments

Kavita Rawat said…
जहाँ हमने दुनिया को बीच में ला दिया
वहीँ सबकुछ चौपट
बहुत खूब!

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